

श्रीमती धरिक्षणा कुंवरी एक अत्यंत सम्मानित, शिक्षित और समाजसेवी महिला थीं, जिन्होंने अपने पूरे जीवन को शिक्षा और समाज के उत्थान के लिए समर्पित कर दिया। वे ज्ञान, त्याग और सेवा की प्रतिमूर्ति मानी जाती हैं। उनका जीवन सादगी, धैर्य और समाज के प्रति गहरी निष्ठा का उदाहरण है।
वे उस समय में महिलाओं की शिक्षा की समर्थक थीं, जब समाज में लड़कियों की पढ़ाई को अधिक महत्व नहीं दिया जाता था। उन्होंने स्वयं शिक्षित होकर यह संकल्प लिया कि समाज की अन्य महिलाएं और बच्चे भी शिक्षा से वंचित न रहें।
उनका जन्म वर्ष 1889 में बिहार के बक्सर जिले के डुमरी गांव में हुआ था। उनका जीवन ग्रामीण परिवेश में बीता, लेकिन उनकी सोच बहुत दूरदर्शी थी। उन्होंने अपने जीवन में अनेक सामाजिक कार्य किए और शिक्षा को बढ़ावा देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
श्रीमती कुंवरी जी का योगदान अविस्मरणीय है। उन्होंने अपनी जमीन और धन शिक्षा के लिए दान कर दिया, जो अपने आप में एक बहुत बड़ा त्याग था। उन्होंने ₹2,61,000 नगद राशि और लगभग 20 बीघा जमीन दान दी, ताकि गरीब और ग्रामीण क्षेत्र के विद्यार्थियों को उच्च शिक्षा मिल सके।
इसी महान दान के परिणामस्वरूप धरिक्षणा कुंवरी कॉलेज (D.K. College) की स्थापना 26 जून 1956 को हुई। यह कॉलेज पहले डुमरी में शुरू हुआ, बाद में पुराना भोजपुर और फिर वर्तमान में डुमरांव (बक्सर) में स्थापित हुआ। आज यह कॉलेज वीर कुंवर सिंह विश्वविद्यालय, आरा का एक महत्वपूर्ण अंग है और हजारों विद्यार्थियों को शिक्षा प्रदान कर रहा है।
इस कॉलेज में विज्ञान, कला, वाणिज्य और कंप्यूटर जैसे विषयों में स्नातक (UG) की पढ़ाई होती है, जैसे B.Sc., B.A., B.Com., BBA और BCA। यहां NSS और NCC जैसी गतिविधियां भी चलती हैं, जो छात्रों के व्यक्तित्व विकास में मदद करती हैं।
श्रीमती धरिक्षणा कुंवरी जी का यह दान और कार्य केवल एक संस्था की स्थापना तक सीमित नहीं है, बल्कि यह उनके समाज के प्रति समर्पण, दूरदर्शिता और शिक्षा के प्रति प्रेम का प्रतीक है। उनका यह कार्य आज भी समाज को प्रेरणा देता है कि शिक्षा ही विकास का सबसे बड़ा माध्यम है।
उनका निधन 19 दिसंबर 1956 को हुआ, लेकिन उनके द्वारा किए गए कार्य आज भी जीवित हैं। वे आज भी लोगों के दिलों में एक प्रेरणा स्रोत के रूप में बनी हुई हैं।
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