अक्षय तृतीया 2026 पर विशेष लेख
तिथि: 10 मई 2026 (रविवार)
अक्षय तृतीया का पावन पर्व अत्यंत शुभ माना जाता है। इस दिन भगवान बलभद्र (बलराम) जी और माता रेवती जी के दिव्य विवाह की स्मृति भी जुड़ी हुई है।
पौराणिक इतिहास (स्पष्ट वर्णन)
माता रेवती, राजा ककुद्मी (रैवत) की पुत्री थीं। राजा अपनी पुत्री के लिए योग्य वर की खोज कर रहे थे, लेकिन उन्हें पृथ्वी पर कोई भी योग्य वर नहीं मिल रहा था।
इसी कारण वे रेवती जी को लेकर ब्रह्मलोक गए, ताकि स्वयं भगवान ब्रह्मा से इस विषय में सलाह ले सकें कि उनकी पुत्री के लिए सबसे योग्य वर कौन होगा।
जब वे ब्रह्मलोक पहुँचे, उस समय वहाँ गंधर्वों का संगीत चल रहा था। राजा ककुद्मी ने सोचा कि पहले यह समाप्त हो जाए, फिर वे भगवान ब्रह्मा से बात करेंगे। थोड़ी देर प्रतीक्षा करने के बाद उन्होंने अपनी बात भगवान ब्रह्मा के सामने रखी।
क्यों लौटना पड़ा?
भगवान ब्रह्मा ने उन्हें बताया कि ब्रह्मलोक में जितनी देर वे रुके, उतनी देर में पृथ्वी पर कई युग बीत चुके हैं।
अब वे जिन राजाओं और वरों के बारे में सोच रहे थे, वे सभी बहुत पहले समाप्त हो चुके हैं।
तब भगवान ब्रह्मा ने उन्हें सलाह दी कि अब पृथ्वी पर भगवान बलराम जी ही उनकी पुत्री रेवती के लिए सर्वश्रेष्ठ वर हैं।
जब वे वापस पृथ्वी पर लौटे
जब राजा ककुद्मी और माता रेवती पृथ्वी पर वापस आए, तो उन्होंने देखा कि समय बहुत बदल चुका है—
- मनुष्यों की आयु कम हो गई थी
- शरीर का आकार (कद) पहले से छोटा हो गया था
- पुरानी पीढ़ियाँ समाप्त हो चुकी थीं
माता रेवती का कद उस समय के लोगों की तुलना में बहुत अधिक था।
बलराम जी से विवाह
राजा ककुद्मी ने भगवान बलराम जी से रेवती जी का विवाह करने का निर्णय लिया।
भगवान बलराम जी ने अपने हल के स्पर्श से माता रेवती के कद को वर्तमान युग के अनुसार सामान्य कर दिया और फिर दोनों का विवाह विधिपूर्वक सम्पन्न हुआ।
परिवार से संबंध
भगवान बलराम जी, माता देवकी एवं वसुदेव जी के पुत्र हैं तथा माता रोहिणी के स्नेह में उनका पालन-पोषण हुआ। वे भगवान श्रीकृष्ण के बड़े भाई हैं।
समाज के लिए संदेश
अक्षय तृतीया के इस पावन अवसर पर समाज के सभी लोगों से निवेदन है कि वे भगवान बलभद्र (बलराम) जी एवं माता रेवती जी की पूजा करें।
इससे वैवाहिक जीवन में सुख, समृद्धि और स्थिरता आती है।आप सभी को अक्षय तृतीया 2026 की हार्दिक शुभकामनाएँ
मनोज कुमार शाह तिनसुकिया असम 🙏