
जय बलभद्र, जय बलराम, जय संकर्षण प्रभु श्रीधाम।
जय हलधर, जय हलायुध, जय जय दीनों के सुखधाम।।
रोहिणीनंदन कृपा के सागर, रेवतीपति मंगलकारी।
मूसली वीर नागेश्वर स्वामी, अनंत शेष अवतारी।।
बलदेव कृष्णाग्रज प्यारे, दौर्जय दमन दुष्ट संहारे।।
भक्तों के तुम रखवारे प्रभु, कृषि देव संकट हरता हो तुम ।।
जो भी श्रद्धा से नाम पुकारे, भर दो झोली उसके सारे।
जय जय श्री बलभद्र भगवान, चरणों में हम शरण तुम्हारे।।
रचना – मनोज कुमार शाह, तिनसुकिया, असम 8638014073