श्री बलभद्र पंचविंशति नाम दिक्-रक्षा स्तोत्र

श्री बलभद्र पंचविंशति नाम दिक्-रक्षा स्तोत्र (२५ नाम)

पूर्व दिशा से बलराम प्रभु हमारी रक्षा करें,

पश्चिम दिशा से संकर्षण देव सदा संरक्षण करें।

उत्तर दिशा में बलभद्र बल प्रदान करें,

दक्षिण दिशा में हलधर सब भय हरण करें।

ईशान कोण में हलायुध कृपा बरसाएँ,

अग्नि कोण में रोहिणीनंदन संकट मिटाएँ।

नैऋत्य कोण में रेवतीपति मंगल करें,

वायव्य कोण में मूसली शत्रु दलन करें।

ऊर्ध्व आकाश से नागेश्वर रक्षा करें,

अधो लोक में अनंत आधार धरे।

सर्वदिक् में शेषावतार कवच बन जाएँ,

हृदय मध्य में बलदेव ज्योति जगाएँ।

आगे पथ पर कृष्णाग्रज साथ निभाएँ,

पीछे से दौर्जय सब विघ्न हटाएँ।

दाहिनी ओर दमन दुष्ट संहारे,

बाईं ओर रेवतीनाथ कृपा उचारे।

नेत्रों की रक्षा कृष्णसखा करें,

कर्णों की रक्षा बलशाली हरें।

वाणी की रक्षा हलिन सुहाए,

भुजबल दें मूसलधर धाए।

मन की रक्षा शेषनागस्वरूप करें,

प्राणों की रक्षा लक्ष्मणपूर्वज धरे।

सर्वांग रक्षा दाऊजी भगवान,

घर-आँगन रक्षा धराधर महान।

इस प्रकार पंचविंशति नामों का जो नित करे स्मरण,

चारों ओर दिव्य कवच रचे, मिले प्रभु चरणों में शरण।

संपादक Manoj Kumar Shah

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